संभव है कि मेरी किसी बात से आपको झटका लगे. आपकी आलोचनाओं का मैं स्वागत करूंगा, लेकिन वह स्वस्थ होनी चाहिए. यदि आप मेरे लेखन में कोई तथ्यात्मक भूल बताने कि कृपा करेंगे, तो मैं उसे तत्काल सुधार लूँगा. लेकिन अपने विचारों और निष्कर्षों को बदलने के लिए तब तक तैयार नहीं हूँ, जब तक वैसा करने का कोई पर्याप्त कारण न हो.
Tuesday, September 1, 2015
YOUNG AZAMGARH: दंगा: जैसा हमने झेला - गिरिजेश तिवारी
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